नयी दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तारी के 43 दिन बाद राहत की उम्मीद देते हुए उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कहा कि वह दिल्ली में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उनकी अंतरिम जमानत याचिका पर सात मई को दलीलें सुनने पर विचार कर सकता है और एजेंसी इसके लिए तैयार रहे. केजरीवाल 21 मार्च को गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में यहां तिहाड़ जेल में बंद हैं.

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से कहा कि गिरफ्तारी के खिलाफ केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई में समय लगने की संभावना है और इसलिए, अदालत उन्हें अंतरिम जमानत देने पर जांच एजेंसी का पक्ष सुनने पर विचार कर रही है.

आज की अपनी दलीलें समाप्त कर रहे राजू से पीठ ने कहा, ”ऐसा लगता है कि हम आज सुनवाई पूरी नहीं कर सकते. हम मंगलवार सुबह इसे देखेगे. अगर इसमें समय लगता है तो हम चुनाव की वजह से अंतरिम जमानत के सवाल पर विचार करेंगे.” राजू ने कहा कि वह केजरीवाल को अंतरिम जमानत दिए जाने का विरोध करेंगे. उन्होंने मामले में पिछले महीने आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को जमानत मिलने के बाद उनके द्वारा दिए गए बयानों की ओर इशारा किया.

राजू ने कहा, ”कृपया देखिए कि वह किस तरह के बयान दे रहे हैं.” पीठ ने कहा कि वह एजेंसी को पीठ की मंशा से अवगत करा रही है ताकि सात मई को जब अंतरिम जमानत का मुद्दा आए तो वह चौंक नहीं जाए. पीठ ने कहा, ”हम सिर्फ कह रहे हैं कि हम अंतरिम जमानत पर सुनवाई करेंगे और यह नहीं कह रहे कि हम अंतरिम जमानत देंगे. हम अंतरिम जमानत दे भी सकते हैं और नहीं भी दे सकते.” उसने केजरीवाल की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी से कहा, ”एक चीज और. कृपया निर्देश भी लीजिए. क्योंकि वह जिस पद पर हैं, क्या उन्हें आधिकारिक फाइलों पर हस्ताक्षर करने चाहिए या नहीं करने चाहिए.” सुनवाई के दौरान सिंघवी ने पीठ को सूचित किया कि 16 मार्च को चुनाव की घोषणा की गई और 21 मार्च को केजरीवाल को ईडी ने उसके पास पिछले साल जुलाई से उपलब्ध बयानों और सामग्रियों के आधार पर गिरफ्तार कर लिया.

पीठ ने सिंघवी से पूछा कि दिल्ली में चुनाव कब होने हैं, जिस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने जवाब दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में 23 मई को प्रचार थम जाएगा और 25 मई को मदतान होगा. शीर्ष अदालत ने सिंघवी की इन दलीलों की भी आलोचना की कि राजनीतिक दल होने के नाते ‘आप’ धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) की धारा 70 के दायरे में नहीं आएगी जो कंपनियों के अपराधों से संबंधित है.

पीठ ने कहा, ”आपकी दलीलों को स्वीकार करना मुश्किल है.” शीर्ष अदालत ने 15 अप्रैल को ईडी को नोटिस जारी किया था और केजरीवाल की याचिका पर जवाब देने को कहा था. इससे पहले नौ अप्रैल को उच्च न्यायालय ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को बरकरार रखते हुए कहा था कि यह गैरकानूनी नहीं है और केजरीवाल को बार-बार जारी समन की अवहेलना करने और जांच में शामिल नहीं होने के बाद ईडी के पास ”बहुत कम विकल्प” बचा था.