इंफाल: एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन में, सात महिलाओं ने शुक्रवार को जातीय ंिहसा प्रभावित मणिपुर में शांति और एकता का संदेश फैलाने के लिए अपने सिर मुंडवाए और एक साइकिल रैली निकाली। काले कपड़े पहनीं इन महिलाओं ने इंफाल के मध्य में एक सीमांत गांव सेकमाई से कांगला तक कम से कम 19 किमी की दूरी तय की।

सात महिलाओं के साथ आई एक अधेड़ उम्र की महिला के. शांति ने कहा, बाल मुंडवाना एक प्रतीकात्मक संकेत है। ऐसा करने का उद्देश्य चुराचांदपुर और कांगपोकपी के निकटवर्ती पहाड़ी इलाकों में स्थित उग्रवादियों द्वारा इंफाल घाटी के सीमांत क्षेत्रों पर समय-समय पर होने वाली गोलीबारी को रोकने में सरकार की असमर्थता का विरोध करना है। हम सब थक चुके हैं। हम शांति चाहते हैं।

कांगला से मीरा पैबी नामक सामाजिक संगठन की नेता एम. सोबिता देवी ने कहा, राज्य में तीन मई को ंिहसा का एक साल पूरा हो गया। आज हम एक बार फिर तोरबुंग और फौगाचाओ के किसानों, दिहाड़ी मजदूरों पर हुए नुकसान और अत्याचारों को याद करते हैं, जिन पर चुराचांदपुर की एक सशस्त्र भीड़ ने बिना उकसावे के हमला किया था।

महिलाओं ने साइकिलों पर तख्तियां लखा रखी थीं जिस पर लिखा था, हम शांति चाहते हैं, अलग प्रशासन नहीं, क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करें। राहत शिविरों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों और खुमुजाम्बा मेइती लेईकाई पट्टादार एसोसिएशन ने भी इंफाल ईस्ट जिले के अकामापत में ंिहसा के एक वर्ष पूरे होने पर कार्यक्रम आयोजित किया।

पिछले साल तीन मई को जातीय झड़पें शुरू होने के बाद से राज्य में 219 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग घरों से विस्थापित हो गए हैं। यह ंिहसा तब हुई जब मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) की स्थिति की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘जनजाति एकजुटता मार्च’ आयोजित किया गया था।