नयी दिल्ली. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-स्नातक’ में प्रश्नपत्र लीक होने का दावा करने वाली खबरें ”पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद” हैं. प्रत्येक प्रश्नपत्र का ”हिसाब रखे जाने” का दावा करते हुए एनटीए ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रश्नपत्र की कथित तस्वीरों का वास्तविक प्रश्नपत्र से कोई संबंध नहीं है.

एनटीए की वरिष्ठ निदेशक साधना पाराशर ने कहा, ”एनटीए के सुरक्षा प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रियाओं से यह पता चला है कि पेपर लीक की ओर इशारा करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद हैं.” उन्होंने कहा, ”अफवाहों पर विराम लगाने के लिए, यह भी कहना चाहेंगे कि प्रत्येक प्रश्न पत्र का हिसाब-किताब रखा गया है.”

पाराशर ने कहा कि परीक्षा शुरू होने के बाद कोई भी बाहरी व्यक्ति या एजेंसी केंद्रों तक नहीं पहुंच सकती. उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों के गेट बंद होने के बाद, बाहर से किसी को भी हॉल के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं है और हॉल में सीसीटीवी से निगरानी रखी जाती है. उन्होंने कहा, ”सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रश्नपत्रों की तस्वीरों का वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र से कोई संबंध नहीं है.” प्रवेश परीक्षा रविवार को विदेश के 14 शहरों सहित 571 शहरों के 4,750 केंद्रों पर आयोजित की गई थी.

रविवार से ही सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र लीक होने की खबरें आने के बीच कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने भी इस मुद्दे को उठाया है.
प्रियंका ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”एक बार फिर से नीट का पेपर लीक होने की खबरें आ रही हैं. देश के 24 लाख युवाओं के भविष्य के साथ फिर से खिलवाड़ हुआ. पिछले 10 वर्षों से करोड़ों होनहार युवाओं के साथ चल रहा यह सिलसिला बंद होने का नाम नहीं ले रहा है.” उन्होंने कहा, ”क्या देश के प्रधानमंत्री इस पर कुछ कहेंगे? युवाओं को बहलाने के लिए संसद में पेपर लीक के खिलाफ कानून पास हुआ था. वह कानून कहां है? लागू क्यों नहीं होता? ” एनटीए ने रविवार को दावा किया था कि राजस्थान के एक परीक्षा केंद्र पर गलत प्रश्नपत्र वितरित किए जाने के कारण कुछ अभ्यर्थी पेपर लेकर बाहर चले गए थे. एजेंसी ने प्रश्नपत्र के लीक होने की बात से इनकार किया था.

पाराशर ने कहा कि बाद में परीक्षा केंद्र के 120 प्रभावित अ्भ्यियथयों के लिए परीक्षा दोबारा आयोजित की गई थी. एनटीए ने स्वीकार किया कि कदाचार और नकल के मामले सामने आए हैं और इसमें शामिल अ्भ्यियथयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. पाराशर ने कहा, ”एनटीए अनुचित साधनों के इस्तेमाल के मामलों का पता लगाने के लिए परीक्षा के बाद डेटा विश्लेषण भी करता है, जिस पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है. इसमें अभ्यर्थी का पंजीकरण रद्द करना और भविष्य की परीक्षाओं से उसे वंचित करना शामिल है.”

इस वर्ष, राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) के लिए 24 लाख से अधिक अ्भ्यियथयों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 10 लाख से अधिक लड़के, 13 लाख से अधिक लड़कियां और 24 छात्र तृतीय लिंग श्रेणी के तहत पंजीकृत थे. पिछले साल, कुल 20,87,449 अ्भ्यियथयों ने नीट-स्नातक के लिए पंजीकरण कराया था और परीक्षा सात मई को आयोजित की गई थी. परीक्षा में 97.7 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई थी.