यरुशलम/वाशिंगटन. इजराइली सेना ने बुधवार को कहा कि उसने गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण केरेम शालोम क्रॉसिंग को फिर से खोल दिया है. क्रॉसिंग के समीप हमास के एक रॉकेट हमले में चार इजराइली सैनिकों के मारे जाने के बाद इसे रविवार को बंद कर दिया गया था. हालांकि फलस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने कहा कि फलस्तीनी पक्ष में अभी तक कोई सहायता नहीं पहुंची है और इसे प्राप्त करने वाला भी कोई नहीं है.

अमेरिका ने पिछले सप्ताह इस चिंता के कारण इजराइल को हथियारों की खेप रोक दी थी कि इजराइल रफह पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू करने वाला है. अमेरिका ने कहा है कि वह रफह में फंसे लगभग 13 लाख फलस्तीनियों के भाग्य को लेकर चिंतित है, जिनमें से अधिकतर दूसरी जगहों से आए थे.

इजराइल का कहना है कि रफह हमास का आखिरी गढ. है और समूह की सैन्य और शासन क्षमताओं को खत्म करने के लिए वहां व्यापक हमले की जरूरत है. इस बीच, अमेरिका, मिस्र और कतर एक अस्थायी संघर्ष विराम और हमास के कब्जे में अभी भी मौजूद कई इजराइली बंधकों की रिहाई के लिए संभावित समझौते को लेकर प्रयास तेज कर रहे हैं. ‘एसोसिएटेड प्रेस’ के पत्रकारों ने रातभर इलाके में विस्फोट और गोलीबारी की आवाजें सुनीं. इसमें बुधवार को सुबह हुए दो विस्फोट भी शामिल थे.

युद्ध की शुरुआत से ही रफह मानवीय सहायता का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है और यह इकलौता क्षेत्र है जहां से लोग गाजा में आ और जा सकते हैं. करीब दो दशक पहले क्षेत्र से सैनिकों की वापसी के बाद से पहली बार गाजा सीमा की सभी क्रॉसिंग पर इजराइल का कब्जा है. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि चिकित्सीय इलाज के लिए जाने वाले कम से कम 46 मरीज और घायल फंस गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और सहायता समूहों ने हाल के सप्ताहों में मानवीय सहायता बढ.ा दी है क्योंकि इज.राइल ने अपने निकटतम सहयोगी अमेरिका के दबाव में कुछ प्रतिबंध हटा दिए हैं और उत्तर में एक अतिरिक्त क्रॉसिंग खोल दी है. लेकिन सहायता र्किमयों का कहना है कि ईंधन वाले ट्रक और जेनरेटरों के लिए इकलौते प्रवेश द्वार रफह के बंद होने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि उत्तरी गाजा पहले ही ”पूरी तरह अकाल” की स्थिति में है.

ऐसा लगता है कि क्रॉसिंग पर कब्जा जमाने का अभियान सीमित हमला था न कि रफह पर बड़ा आक्रामण, जिसका इजराइल ने वादा किया था. लेकिन इजराइल ने कहा है कि अगर संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई को लेकर हमास के साथ जारी सीधी वार्ता में कोई प्रगति नहीं होती है तो वह अपने अभियान का विस्तार करेगा.

रफह पर हमले को लेकर अमेरिका चिंतित; इजराइल को गोला बारूद की आपूर्ति रोकी

अमेरिका ने उसकी इच्छा के विपरीत गाजा के रफह शहर पर बड़े पैमाने पर हमला करने के इजराइल के फैसले को लेकर चिंता व्यक्त करने के लिए पिछले सप्ताह इजराइल को गोला बारूद की खेप की आपूर्ति रोक दी है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि खेप में 2000 पाउंड वजन (900 किलोग्राम) के 1800 बम और 500 पाउंड वजनी (225 किलोग्राम) 1700 बम भेजे जाने थे. अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि कैसे इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटकों का इस्तेमाल घनी आबादी वाले क्षेत्र में किया जा सकता है.

चरमपंथी हमास द्वारा पिछले साल सात अक्टूबर को इजराइल पर घातक हमला किये जाने के जवाब में इजराइल ने गाजा पट्टी पर आक्रमण शुरू कर दिया था, जिसके बाद से 10 लाख से अधिक नागरिकों ने रफह में शरण ली हुई है. अमेरिका ने ऐतिहासिक रूप से इजराइल को भारी मात्रा में सैन्य सहायता मुहैया कराई है. हमास के सात अक्टूबर के हमले के बाद इसमें काफी तेजी दिखी गई. हमास के हमले में इजराइल में लगभग 1,200 लोगों की जान चली गई थी और लगभग 250 लोगों को चरमपंथियों ने बंधक बना लिया.

गोला बारूद की खेप को रोकने से इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन के बीच बढ़ता गतिरोध और खुलकर सामने आया गया है. बाइडन ने इजराइल से गाजा में निर्दोष नागरिकों की रक्षा के लिए और अधिक उचित कदम उठाने का आह्वान किया था.

वहीं, बाइडन प्रशासन इस हफ्ते इस बात पर फैसला दे सकता है कि क्या इजराइल द्वारा गाजा में हवाई हमला और उस तक सहायता सामग्री न पहुंचने देने में अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी कानूनों का उल्लंघन हुआ है जो नागरिकों को युद्ध की भीषणता से बचाने के लिए बनाए गए हैं.

व्हाइट हाउस की ओर से कई महीने तक आपत्ति दर्ज कराए जाने के बावजूद इजराइली सरकार रफह पर आक्रमण की तैयार करती रही, जिसके बाद अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने इजराइल को भविष्य में सैन्य सहायता भेजने की समीक्षा शुरू कर दी. अधिकारी ने बताया कि गोला बारूद की खेप की आपूर्ति रोकने का निर्णय पिछले सप्ताह लिया गया और खेप निकट भविष्य में इजराइल को भेजी जाएगी या नहीं, इस पर निर्णय नहीं लिया गया है.