नयी दिल्ली. दिल्ली पुलिस को संदेह है कि कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम के राष्ट्रीय समन्वयक अरुण रेड्डी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के फर्जी वीडियो बनाने वाले ”मुख्य” व्यक्ति हैं. आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी. हैदराबाद के रहने वाले रेड्डी को तीन मई को पश्चिमी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया. उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें एक अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें तीन दिन के लिए दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ की हिरासत में भेज दिया. पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, फर्जी वीडियो मामले में जांच से कुछ और नामों का खुलासा हुआ है जिनके रेड्डी का सहयोगी होने का संदेह है.

अधिकारी ने बताया कि पुलिस को संदेह है कि इन लोगों ने रेड्डी को फर्जी वीडियो बनाने और चुनाव के दौरान गलत सूचना फैलाने के लिए इसे सोशल मीडिया पर साझा करने में मदद की. आधिकारिक सूत्र ने बताया कि रेड्डी के पास से जब्त किये गए मोबाइल फोन और लैपटॉप की जांच रिपोर्ट फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) से आनी अभी बाकी है. लेकिन अब तक जांचकर्ताओं ने यह संकेत दिया है कि वह (रेड्डी) फर्जी वीडियो बनाने वाले मुख्य लोगों में शामिल थे.

आधिकारिक सूत्र ने बताया कि 28 अप्रैल को मामला दर्ज होने के बाद से तेलंगाना में डेरा डाल रखी विशेष प्रकोष्ठ की एक टीम ने साक्ष्य जुटाने के लिए सोमवार और मंगलवार को हैदराबाद में कई स्थानों पर छापेमारी की. उन्होंने कुछ लोगों से पूछताछ भी की.
प्रकोष्ठ ने गृह मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की शिकायत पर एक प्राथमिकी दर्ज की है. पुलिस ने बाद में इसमें आपराधिक साजिश की धारा भी जोड़ दी. उक्त शिकायत शाह के एक फर्जी वीडियो के बारे में है, जिसमें उनके बयान को बदल दिया गया था. उन्होंने अपने बयान में, तेलंगाना में धार्मिक आधार पर मुसलमानों का आरक्षण खत्म करने की प्रतिबद्धता का संकेत दिया था, जिसे वीडियो में बदल कर इस तरह से दर्शाया गया जैसे कि वह सभी आरक्षण को खत्म करने का समर्थन कर रहे हों.