नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को जेल में बंद विधायक अब्बास अंसारी को अपने दिवंगत पिता मुख्तार अंसारी की याद में 10 जून को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में उनके घर पर आयोजित होने वाली शोकसभा में शामिल होने की अनुमति दे दी।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने अब्बास अंसारी को 11 और 12 जून को पुलिस हिरासत में अपने परिवार के साथ समय बिताने की भी अनुमति दी और राज्य पुलिस को इस संबंध में आवश्यक बंदोबस्त करने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि अंसारी को नौ जून से पहले गाजीपुर जेल में स्थानांतरित किया जाए और बिना किसी अवरोध के शोकसभा में शामिल होने की अनुमति दी जाए। पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता को 10 जून को शाम छह बजे गाजीपुर वापस ले जाया जाएगा और 11 जून तथा 12 जून को सुबह नौ बजे फिर से उनके घर ले जाया जाएगा और दोनों दिन अपने परिवार तथा करीबी रिश्तेदारों के साथ समय बिताने की अनुमति दी जाएगी।’’ शीर्ष अदालत ने अब्बास अंसारी को 13 जून को कासगंज जेल वापस भेजने का निर्देश दिया।

उत्तर प्रदेश की अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) गरिमा प्रसाद ने कहा कि अब्बास के खुद के कबूलनामे के हिसाब से उनके पिता की मृत्यु से संबंधित सभी रस्म पूरी कर ली गई हैं और अब कोई रस्म नहीं बची है। प्रसाद ने पीठ से अनुरोध किया कि आदेश में यह कहा जाए कि इसे मिसाल के तौर पर नहीं लिया जाएगा क्योंकि राज्य में एक लाख से अधिक कैदी हैं और अदालत में इस तरह के अनुरोधों की बाढ़ आ जाएगी।

इस पर पीठ ने कहा, ‘‘कानून व्यवस्था से आपको निपटना है। हमें एक लाख लोगों को इस तरह की राहत देने में कोई आपत्ति नहीं है।’’ मुख्तार अंसारी की 28 मार्च को उत्तर प्रदेश के बांदा में एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने अब्बास अंसारी को अपने दिवंगत पिता के चालीसवें में आॅनलाइन तरीके से शामिल होने की अनुमति दी थी।