नयी दिल्ली/संयुक्त राष्ट्र. भारत ने बुधवार को कहा कि गाजा में संयुक्त राष्ट्र के साथ काम करने वाले भारतीय नागरिक कर्नल (सेवानिवृत्त) वैभव अनिल काले की मौत पर उसे गहरा दुख हुआ है. विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के साथ-साथ तेल अवीव और रामल्ला में इसका दूतावास काले के पार्थिव शरीर को भारत वापस लाने में हर संभव सहायता प्रदान कर रहे हैं. गत सोमवार को गाजा के रफह क्षेत्र में काले के वाहन पर हुए हमले में उनकी मौत हो गई.

विदेश मंत्रालय ने कहा, ”13 मई को गाजा में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा विभाग (डीएसएस) में सुरक्षा समन्वय अधिकारी कर्नल वैभव अनिल काले (सेवानिवृत्त) की मौत से हमें गहरा दुख हुआ है.” उसने यह भी कहा ”हम उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं.” विदेश मंत्रालय का कहना है, ”न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में हमारा स्थायी मिशन और तेल अवीव और रामल्लाह में हमारे दूतावास पार्थिव शरीर को भारत वापस लाने में सभी सहायता दे रहे हैं और घटना की जांच के संबंध में संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने हुए हैं.”

संयुक्त राष्ट्र ने गाजा में भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी की मौत पर शोक व्यक्त किया
गाजा के रफह शहर में हमले की चपेट में आने के कारण संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने वाले भारतीय सेना के एक पूर्व अधिकारी की मौत पर संयुक्त राष्ट्र ने शोक व्यक्त करने के साथ ही भारत से माफी मांगी है. कर्नल वैभव अनिल काले (46) 2022 में भारतीय सेना से समय पूर्व सेवानिवृत्त हुए थे और दो महीने पहले संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा एवं संरक्षा विभाग (यूएनडीएसएस) में सुरक्षा समन्वय अधिकारी नियुक्त किए गए थे.

सोमवार की सुबह यूएनडीएसएस के अन्य कर्मचारियों के साथ वह संयुक्त राष्ट्र के वाहन में रफह स्थित ‘यूरोपियन अस्पताल’ जा रहे थे तभी हमले की चपेट में आ गए जिसमें उनकी मौत हो गई और जोर्डन का एक अन्य डीएसएस कर्मचारी घायल हो गया. समझा जाता है कि वाहन पर इजराइली टैंक की ओर से कार्रवाई की गई थी.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के उप प्रवक्ता फरहान हक ने ‘पीटीआई-भाषा’ के एक सवाल के जवाब में मंगलवार को दैनिक प्रेस वार्ता में कहा, “हम भारत की सरकार और लोगों के प्रति खेद और संवेदना व्यक्त करते हैं.” उन्होंने कहा, ”भारत ने जो योगदान दिया है हम उसकी सराहना करते हैं.” हक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने घातक हमले की जांच के लिए एक टीम का गठन किया है.