नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मौजूदा लोकसभा चुनावों में अच्छे बहुमत के साथ जीत हासिल कर दोबारा सत्ता में लौटने वाले हैं. अगर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इस चुनाव में जीत मिलती है तो मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभालेंगे. चुनावी नतीजों की घोषणा चार जून को होगी.

सीतारमण ने यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की सालाना कारोबार बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “हमें विश्वास है कि प्रधानमंत्री मोदी अच्छे बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर रहे हैं.” उन्होंने उद्योग जगत के दिग्गजों की मौजूदगी में कहा, “नई सरकार बनने के तत्काल बाद हम जुलाई में पेश होने वाले आम बजट को लेकर सीआईआई के साथ संवाद कायम करेंगे. इस बारे में सीआईआई की टीम के साथ काफी परामर्श होना है.” वित्त मंत्री ने कहा कि देश में वृद्धि के अपार अवसर हैं और वे अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों तक फैले हुए हैं. वैश्विक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता को आईएमएफ और एसएंडपी जैसी वैश्विक एजेंसियों ने भी मान्यता दी है.

उन्होंने कहा कि उपभोग व्यय में वृद्धि के कारण विशाल भारतीय उपभोक्ता बाजार के 2031 तक दोगुना होने की उम्मीद है. इससे यह सुनिश्चित होगा कि देश भविष्य में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा. सीतारमण ने कहा कि रिजर्व बैंक और आर्थिक समीक्षा के मुताबिक भारत अतीत की दोहरी बहीखाते की समस्या से उबरकर दोहरे बहीखाता लाभ की ओर बढ़ गया है. इससे बाजार में जीवंतता आई है और कंपनियों का निवेश बढ़ा है. दोहरी बहीखाते की समस्या से आशय एक तरफ बैंकों के फंसे कर्ज के बढ़ने और दूसरी तरफ कंपनियों पर जरूरत से ज्यादा कर्ज के होने से है.

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को अपनी जनसंख्या के उम्र आधारित लाभांश अगले 30 वर्षों तक मिलता रहेगा. सार्वजनिक-निजी भागीदारी से कौशल विकास पर ध्यान देकर समृद्धि और उपभोक्ता मांग बढ़ाई जा सकती है. वित्त मंत्री ने कहा कि हरित ऊर्जा और टिकाऊ भविष्य की दिशा में भारत का बदलाव नए बाजार और मांग पैदा करेगा. सौर ऊर्जा को सरकारी प्रोत्साहन और हरित हाइड्रोजन एवं हरित अमोनिया को बढ़ावा देने से युवाओं को रोजगार अवसर भी मिलेंगे.

भारत को विनिर्माण क्षेत्र में तेजी लाने की जररूत : सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि देश को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए अपने विनिर्माण क्षेत्र में तेजी लाने की जरूरत है. सीआईआई वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में भारतीय उद्योग के प्रमुखों को संबोधित करते हुए मंत्री ने उत्पाद निर्माण और नीति समर्थन में अधिक परिष्­करण हासिल करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया.

सीतारमण ने कहा, ” मैं कुछ अर्थशा्त्रिरयों द्वारा दी गई इस सलाह के विपरीत कुछ रेखांकित करना चाहती हूं कि भारत को अब विनिर्माण पर ध्यान नहीं देना चाहिए या विनिर्माण में तेजी नहीं लानी चाहिए… . मैं इस तथ्य पर जोर देना चाहती हूं कि विनिर्माण में वृद्धि होनी चाहिए. भारत को नीतियों की मदद से वैश्विक मूल्य श्रृंखला में अपनी (विनिर्माण) हिस्सेदारी भी बढ़ानी चाहिए.” भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन सहित कुछ अर्थशा्त्रिरयों ने राय व्यक्त की है कि भारत को विनिर्माण के बजाय सेवा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि उसने वह अवसर गंवा दिया है. उनका कहना है कि चीन के विनिर्माण-आधारित वृद्धि मॉडल को अब और दोहराया नहीं जा सकता.