पटना/नयी दिल्ली. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि कर्नाटक सहित वे राज्य जहां उनकी पार्टी की सरकार रही है, वहां कभी भी अल्पसंख्यकों को आरक्षण धर्म के अधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर दिया गया. पटना स्थित कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जयराम रमेश ने यह बात कही .

उन्होंने कहा, ”हम उस संविधान का पालन करते हैं जो धर्म के आधार पर आरक्षण और नागरिकता देने की अनुमति नहीं देता है. यह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) है जिसने नागरिका (संशोधन) अधिनियम जो धार्मिक आधार पर नागरिकता देने के अलावा और कुछ नहीं है, के जरिए संविधान का उल्लंघन किया है. इसे अदालत में चुनौती दी गई है.” अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव ने रमेश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित भाजपा नेताओं के आरोपों उन आरोपों का जवाब दे रहे थे जिसमें भाजपा ने कहा था कि कांग्रेस अन्य पिछड़ा वर्ग और दलितों के लिए निर्धारित आरक्षण छीनकर अपने ‘वोट बैंक’ मुसलमानों को देने जा रही है.

रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ”एक के बाद एक झूठे बयान दे रहे हैं” और दावा किया, ”वह इस एहसास से हताशा हैं कि वह एक निवर्तमान (निवर्तमान) प्रधानमंत्री हैं.” उन्होंने दावा किया, ”कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन ‘इंडिया’ लोकसभा चुनाव में ”निर्णायक जनादेश” हासिल करने की राह पर है, बिल्कुल उसी तरह जिस तरह 2004 में हमने राज्य विधानसभा चुनावों में हार के बाद वापसी की थी. यह कहा जा रहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा को हराया नहीं जा सकता.” रमेश ने मोदी को चुनौती दी कि वे ”जाति जनगणना, किसानों की कर्ज माफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और चीन की सेना के भारतीय सीमा में दाखिल होने” के मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ें.

उन्होंने दावा किया, ”कांग्रेस हमेशा सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध रही है और तमिलनाडु में वंचित वर्गों को दिए गए 69 प्रतिशत आरक्षण का उदाहरण दिया, जिसे पी.वी. नरसिम्हा के समय संविधान की नौवीं अनुसूची में जोड़कर कानूनी रूप से सुरक्षित किया गया था.” रमेश ने कहा, ”कांग्रेस संवैधानिक संशोधन के माध्यम से आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को खत्म करने के लिए भी प्रतिबद्ध है. हम चाहेंगे कि प्रधानमंत्री यह खुलासा करें कि वह इस तरह के कदम के पक्ष में हैं या नहीं.”’

मोदी सरकार के ‘अन्याय काल’ का सामना कर रहा है लद्दाख: जयराम रमेश

कांग्रेस ने लद्दाख लोकसभा सीट पर मतदान से एक दिन पहले रविवार को आरोप लगाया कि यह केंद्र शासित प्रदेश पिछले 10 वर्षों से मोदी सरकार के ”दुर्भावनापूर्ण और सौतेले व्यवहार” का सामना कर रहा है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि लद्दाखवासी भीषण ठंड के बीच अपनी जमीन और पानी पर नियंत्रण की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, “विरोध प्रदर्शन महीनों से चल रहा है, जिसमें सभी 8 जनजातियां और 30,000 से अधिक लोग भूख हड़ताल और विशाल मार्च के लिए एकसाथ आये हैं.” रमेश ने दावा किया कि मोदी सरकार की एकमात्र प्रतिक्रिया लगातार चुप्पी और उदासीनता रही है.
कांग्रेस महासचिव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि 20 मई को, लद्दाख में चुनाव होंगे, और “पिछले 10 वर्षों से, लद्दाख मोदी सरकार के अन्यायकाल-पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण और सौतेले व्यवहार- का सामना कर रहा है.”

उन्होंने कहा, ”अगस्त 2019 में, मोदी सरकार ने लद्दाख को बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश में तब्दील करके वहां के लोगों का सारा प्रतिनिधित्व छीन लिया.” रमेश ने दावा किया, ”मोदी सरकार और उसके करीबी कॉरपोरेट मित्रों का लालच लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को खतरे में डाल रहा है. खनन जैसे क्षेत्रों से जुड़े कॉरपोरेट की नजरें लद्दाख के प्राकृतिक संसाधनों पर हैं और यदि मोदी सरकार को सत्ता में वापस आने दिया गया, तो उन्हें भूमि और लोगों से सम्पदा हथियाने से कोई नहीं रोक सकता.” उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे क्षेत्र को एक उपराज्यपाल के माध्यम से दिल्ली से “रिमोट-नियंत्रित” किया जा रहा है. पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री रमेश ने कहा कि पर्यटकों की भारी आमद और शहरीकरण लद्दाख के संसाधनों पर दबाव डाल रहा है, जिससे पानी की कमी पैदा हो रही है.

उन्होंने आरोप लगाया, ”इसके अलावा, मोदी सरकार की कमजोरी ने लद्दाख की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया है: मोदी सरकार की कायरता ने चीन को लद्दाख में 2,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा करने दिया और 65 गश्त बिंदुओं में से 26 छीन लिये गए हैं.” उन्होंने दावा किया, ”चीनी कब्जे ने सीधे तौर पर हजारों लद्दाखियों को प्रभावित किया है, खासकर देशी चरवाहों को, जो सीमा के पास ऊंचे इलाकों में अपनी भेड़-बकरियां चराते हैं.” रमेश ने कहा कि कांग्रेस के ‘न्याय पत्र’ में स्पष्ट रूप से लद्दाख के जनजातीय क्षेत्रों को छठी अनुसूची का दर्जा देने, स्थानीय लोगों को देशी संस्कृति और क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण स्वायत्तता देने का वादा किया गया है.

उन्होंने कहा, ”हमने पर्यावरणीय मुद्दों, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एक विस्तृत योजना की रूपरेखा भी तैयार की है. चार जून को लद्दाख अपने उपचार की प्रक्रिया शुरू करेगा और समृद्धि और स्थिरता के पथ पर लौटेगा.” ठंडा रेगिस्तानी क्षेत्र लद्दाख, क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र होने का गौरव रखता है. इसमें लगभग 1.84 लाख मतदाता हैं – करगिल जिले में लगभग 96,000 और लेह जिले में 88,000 से अधिक.

‘भ्रष्ट जनता पार्टी’ ने आदिवासी अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की: जयराम रमेश

कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आदिवासी अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के वन संरक्षण संशोधन अधिनियम ने 2006 के ऐतिहासिक वन अधिकार अधिनियम के तहत हुई तमाम प्रगति को रोक दिया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने झारखंड के जमशेदपुर में प्रधानमंत्री मोदी की रैली से पहले उनसे कुछ सवाल पूछे.

रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”जमशेदपुर के लोग अब भी खराब संपर्क सुविधा की समस्या से क्यों जूझ रहे हैं? ऐसा क्यों है कि 2ए (अंबानी और अडाणी) और काले धन से भरे उनके टेम्पो खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन झारखंड के आदिवासी मुख्यमंत्री को जेल में डाल दिया गया? आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र को अब तक पर्यावरण मंजूरी क्यों नहीं मिली? प्रधानमंत्री ने आदिवासियों को उनकी धार्मिक पहचान से वंचित क्यों किया और सरना कोड को मान्यता देने से इनकार क्यों किया?” उन्होंने ”जुमलों का विवरण” शीर्षक के तहत अपने प्रश्नों के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि एक औद्योगिक केंद्र होने के बावजूद जमशेदपुर खराब परिवहन संपर्क सुविधा की समस्या से जूझ रहा है.