नयी दिल्ली. कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोमवार आरोप लगाया कि दिल्ली में पिछले कई विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) केंद्र की सत्ता में आने के बाद से राष्ट्रीय राजधानी के लोगों से बदला ले रही है. उन्होंने यहां संवाददाताओं से बातचीत में यह भी कहा कि दिल्ली देश के शेष हिस्से की स्थिति को बयां करती है तथा यहां के गरीबों की हालत देखने के बाद कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि भारत के दूसरे हिस्सों में गरीब किस हालत में होंगे. खेड़ा ने आरोप लगाया कि जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, ऐसा लगता है कि वह दिल्ली से बदला ले रही है.

उन्होंने कहा कि इसके पीछे कारण यह है कि 1998 से लेकर आज तक राष्ट्रीय राजधानी ने भाजपा को दोबारा मौका नहीं दिया.
खेड़ा ने कहा, ”देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली के मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दे हैं. दिल्ली देश में जो हो रहा है, उसका प्रतिबिंब है.” उन्होंने कहा, ”आज अगर दिल्ली में दिहाड़ी मजदूरों और जेजे क्लस्टर में रहने वाले हमारे भाई-बहनों की हालत खराब है, तो आपको पता होना चाहिए कि यह पूरे देश का प्रतिबिंब है. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि देश में क्या हो रहा है.” खेड़ा ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किया गया ‘न्याय’ शब्द महज एक शब्द नहीं है, बल्कि ”हमारे संविधान और कांग्रेस पार्टी की विचारधारा का सार है.” राष्ट्रीय राजधानी में मतदान 25 मई को होगा. दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गठबंधन में चुनाव लड़ रही हैं.

कांग्रेस ने चीन के साथ भाजपा के कथित संबंधों को लेकर प्रधानमंत्री से सवाल किए

कांग्रेस ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का चीन के साथ करीबी संबंध होने का आरोप लगाया और 2008 से इसके नेताओं एवं चीनी अधिकारियों के बीच हुई 12 उच्च स्तरीय बैठकों के पूर्ण विवरण की मांग करते हुए सत्तारूढ. दल और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कई सवाल किए.

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने एक बयान में यह सवाल भी किया कि क्या भाजपा के चीन के साथ ”घनिष्ठ संबंध” हैं और दोनों पक्षों के बीच कई बैठकों का नतीजा क्या रहा है? उन्होंने कहा, ”जून 2020 में निवर्तमान प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने चीन को लद्दाख में उसकी गतिविधियों के लिए क्लीन चिट दे दी थी. इसके बाद से भारत के लोग पूछ रहे हैं कि भाजपा चीन के सामने खड़े होने की इतनी अनिच्छुक क्यों है. क्या भाजपा और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच घनिष्ठ संबंध हैं?”

खेड़ा ने दावा किया कि वर्ष 2008 के बाद से कम से कम 12 बैठकें हुई हैं जहां भाजपा के नेताओं ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पदाधिकारियों से मुलाकात की है. उन्होंने सवाल किया, ”इनमें से प्रत्येक बैठक में क्या हुआ? ये दोनों पार्टियां इतनी बार क्यों मिलीं? जब भाजपा के लोग कम्युनिस्ट पार्टी ‘स्कूल’ में गए, तो उन्हें क्या सिखाया गया? भाजपा-आरएसएस नेता चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से जून 2017 में क्यों मिले, जब डोकलाम में सीमा पर (दोनों देशों के) सैनिकों के बीच झड़प हुई थी?” कांग्रेस नेता ने कहा, ”हम प्रत्येक बैठक के विवरण की मांग करते हैं.”