नयी दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अंतरिम जमानत के अनुरोध वाली उनकी अर्जी का सोमवार को उच्चतम न्यायालय में विरोध किया. गिरफ्तारी के खिलाफ और अंतरिम जमानत के लिए सोरेन की अर्जी पर शीर्ष अदालत में अपने हलफनामे में, जांच एजेंसी ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्य से यह स्थापित होता है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता अवैध तरीके से संपत्तियां हासिल करने और उनपर कब्जा रखने में शामिल हैं, जो अपराध से अर्जित आय है.

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की एक अवकाशकालीन पीठ सोरेन की गिरफ्तारी के खिलाफ और उनकी अंतरिम जमानत अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई करने वाली है. एजेंसी ने कहा, ”पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) 2002 की धारा के तहत कई बयान दर्ज किये गए हैं जिससे स्थापित होता है कि बरियातू में लालू खटाल के निकट शांति नगर में 8.86 एकड़ जमीन अवैध गैरकानूनी तरीके से हासिल की गई और यह हेमंत सोरेन के कब्जे एवं उपयोग में है तथा यह कृत्य गुप्त तरीके से किया गया.”

लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार अभियान के लिए सोरेन की अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए ईडी ने कहा, ”यह गौर करना जरूरी है कि चुनाव में प्रचार करने का अधिकार न तो मूल अधिकार है ना ही संवैधानिक अधिकार या कानूनी अधिकार है.” जांच एजेंसी ने कहा कि राज्य सरकार की मशीनरी का दुरूपयोग कर जांच को प्रभावित करने और ”अपने पिट्ठुओं के जरिये अपराध की आय को वैध साबित करने” की सोरेन की ओर से कोशिश की जा रही. झारखंड के मुख्यमंत्री पद से सोरेन के इस्तीफा देने के बाद, कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में उन्हें 31 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था.